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Mon, 18 Dec 2017 22:02:04 GMTView
यहां तक की शायरी में जब अपनी बात कहने का मौका आया है तो उन्होंने हम शब्द का ही इस्तेमाल किया है. मगर वो शायर ही क्या जिसका दिल न टूटा हो. आजादी के पहले के हिंदुस्तान में 17 साल के फैज को इश्क हुआ. शहर था लाहौर. उसके तुरंत बाद वो अमृतसर आ गए. दोनों शहरों के बीच यूं तो कुछ ही देर का फासला है. मगर 18 की उम्र में जब फैज वापस लाहौर पहुंचे तो टूटे दिल के साथ लौटे. फैज के दोस्तों ने लिखा है कि उन्होंने किसी को 'उसके' बारे में नहीं बताया. सिर्फ इतना जिक्र किया कि गरीब लड़की थी और उसकी शादी हो गई. इसके बाद उन्हें ब्रिटेन से आईं एलिस मिलीं. जिनके साथ निकाह रचाकर वो जीवन भर साथ रहे. शादी के बाद एलिस को अक्सर ये पूछा जाता कि क्या वो फैज की शायरी समझती ...और अधिक »
Firstpost Hindi Mon, 20 Nov 2017 04:02:34 GMTView
सोमवार को गुजरात और हिमाचल के नतीजों पर डिबेट हो रही थी। पत्रकार अर्नब गोस्वामी इसे मॉडरेट कर रहे थे। उनके साथ पीएमओ के राज्य मंत्री जीतेंद्र सिंह और सपा में पूर्व मंत्री रहे नावेद सिद्दीकी मौजूद थे। Author जनसत्ता ऑनलाइन December 18, 2017 16:09 pm. 0. Shares. Share · Next. गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनाव के नतीजों पर सोमवार को रिपब्लिक चैनल पर डिबेट हुई। एंकर अर्नब गोस्वामी के साथ इसमें पीएमओ के राज्य मंत्री जीतेंद्र सिंह और सपा सरकार में पूर्व मंत्री नावेद सिद्दीकी शायराना अंदाज में नजर आए। गुजरात-हिमाचल प्रदेश चुनाव के नतीजे सोमवार को आए हैं। दोनों ही राज्यों में एकतरफा बढ़त के साथ कमल खिला है। भाजपा की जीत के पीछे क्या वजह रही, यह दिन भर चर्चा का विषय ...
Jansatta Mon, 18 Dec 2017 10:38:34 GMTView
हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। Comments. Login to comment. Showing 0 of 0 comments. पाठकों की चुनिंदा रचनाएं · TUSHAR PANDEY. छोड़ दो. TUSHAR PANDEY. 159. 3. bhagawati vyas · जादू चला दिया. bhagawati vyas. 114. 2. Amitabh Varma. पिता की मौत. Amitabh Varma. 149. Anuj Shukla · कविता और मैं. Anuj Shukla. 86. Rakesh Kumar. घनश्याम गंजा. Rakesh Kumar. 71. jai prakash · एक बात कहूं तुम सुन भी लो. jai prakash. 187. सर्वाधिक पढ़े गए. छुपा के खमोशी में अपनी बेचैनी : साहिर लुधियानवी ...और अधिक »
अमर उजाला Thu, 07 Dec 2017 10:09:27 GMTView
कहते हैं नए लोग बहुत ताज़ादम हैं शायरी में. अच्‍छा लिख रहे हैं. पर कुल मिलाकर हालात बहुत अच्‍छे नहीं. सबने अपनी अपनी चौकियां बना ली हैं. बड़ो के प्रति सम्‍मान नहीं है. वे अपने आप में खुदा हो गए हैं. कहने लगे, ओम जी शायरी कलंदरी का नाम है. यह समाज के सुख दुख से ताल्‍लुक रखती है. आज छोटी उम्र में ही लोग चाहते हैं किताब छप जाए वे जल्‍दी मशहूर हो जाएं. मुझे जब साहित्‍य अकादेमी पुरस्‍कार मिला तो लोगों ने पूछा. इस पुरस्‍कार को लेकर आप क्‍या कहना चाहेंगे तो मैंने कहा कि हमने अपने बुजुर्गों की इतनी जूतियां सीधी की हैं कि नई नस्‍ल के लोगों को तो याद भी नहीं रहेगा कि हमारे बुजुर्ग जूतियां पहनते थे. तो शायरी अफसरी नहीं है, यह जूतियां उठवाने का नाम नहीं है, जूतियां उठाने का ...
NDTV Khabar Sun, 26 Nov 2017 08:21:19 GMTView
हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। Comments. Login to comment. Showing 0 of 0 comments. पाठकों की चुनिंदा रचनाएं · Deepika Dalakoti · वृद्ध और बुद्ध. Deepika Dalakoti. 170. Vipin Sohal. यूँ भुलाया जाए. Vipin Sohal. 206. 1. Neetu Singh · क्योंकि मैं औरत हूँ? Neetu Singh. 181. 1. Vindhya Prakash. जागो हे सामर्थ्यवान. Vindhya Prakash. 81. Hem Tiwari · जीवन एक समझौता है. Hem Tiwari. 185. Vivek Bhushan. रदीफ़-का मौसम आया है. Vivek Bhushan. 89. सर्वाधिक पढ़े गए. होमर के साहित्यिक हवन से ...और अधिक »
अमर उजाला Fri, 01 Dec 2017 13:32:36 GMTView
'जिस शहर में मुंतजिम अंधे हों जलवागाह के, उस शहर में रोशनी की बात बेबुनियाद है, कोठियों से मुल्क के मेयार को मत आंकिये, असल हिन्दुस्तान तो फुटपाथ पर आबाद है।' देश समाज के साथ-साथ अदम गोंडवी की शायरी का राजनीति से गहरा वास्ता रहा है।और अधिक »
Hindustan हिंदी Sun, 17 Dec 2017 13:06:22 GMTView
सरसराती सर्दी और शायरों की महफिल का अपना अलग की लुत्फ रहता है। ऐसी ही एक भव्य महफिल शानिवार की शाम बाराखम्भा रोड़ स्थित मॉडर्न स्कूल के सभागार में सजी, जहां भाषा का जादू, उर्दू कविताओं के लिए उमड़ता भाव और उत्साह बखूबी देखने को मिला। मौका था साहित्य जगत के सबसे पुराने और भव्य शंकर-शाद मुशायरा का। शंकर लाल मुरलीधर सोसायटी द्वारा आयोजित शंकर-शाद मुशायरा डीसीएम की विरासत सर शंकरलाल शंकर और लाला मुरलीधर शाद की स्मृति में आयोजित किया जाता है, जो कि सामाजिक, शैक्षिक व नई दिल्ली की सांस्कृतिक धरोहर में अपने योगदान के लिए जाने जाते हैं। इस सांस्कृतिक धरोहर ने 1953 से उर्दू मुशायरा को साहित्य कला के रूप में प्रसारित किया है और अपनी तरह के इस ...
अमर उजाला Sun, 17 Dec 2017 13:01:00 GMTView
कार्यक्रम का शुभारंभ उद्घाटनकर्ता प्रो. रुकमुद्दीन, मुख्य अतिथि अपर्णा ¨सह, भाजपा नेत्री रेणु देवी, अख्तर हुसैन घायल, राजेश श्रीवास्तव, शकील अहमद, भवेश चतुर्वेदी, अजय प्रकाश पाठक और मंजूबाला पाठक ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए रेणु देवी ने कहा कि यहां के लोग जात पात से ऊपर उठकर प्रेम के माहौल में जीना जानते हैं। उसका एक उदाहरण यह कार्यक्रम है। इसके बाद कवि सम्मेलन सह मुशायरा का दौर शुरू हुआ। इस ठंड में भी उपस्थित लोग कवि और शायरों की प्रस्तुति से अपने साहित्यमन को ताजा करते रहे। कभी ठहाकों का दौर तो कभी श्रृंगार व देशभक्ति की प्रस्तुति। हास्य व्यंग्य के कवि बादशाह प्रेमी के प्रस्तुति पर जमकर ठहाके लगे। डॉ. निशा राय ...
दैनिक जागरण Mon, 18 Dec 2017 20:09:29 GMTView
नई दिल्ली- भाजपा सांसद वरुण गांधी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए एक शायरी पढ़ी। शायरी की आड़ में उन्होंने कई बड़े नेताओं पर निशाना साधने की कोशिश की। वरुण गांधी ने कहा कि, ''हम सायादार पेड़ जमाने के काम आये, जब सूखने लगे तो जलाने के काम आये। कच्‍चा समझ के बेच देना न मकान को हो सके तो मुंह छुपाने के काम आये।'' अपनी शायरी से अप्रत्यक्ष रूप से कई बड़े नेताओं पर निशाना साधा। वरुण गांधी ने कहा, ''आज धर्म आधारित राजनीति की जा रही है लेकिन वह धर्मराज युधिष्ठिर वाले धर्म की तरफदारी करते हैं। उन्‍होंने कहा कि गरीबों की सेवा से बड़ा कोई धर्म नही है।'' राजनीति में एक दूसरे के खिलाफ हुई बयानबाजी से दु:खी वरुण ने बिना किसी का नाम लिये इशारों-इशारों में बहुत ...और अधिक »
इंडिया संवाद Sun, 10 Dec 2017 07:13:57 GMTView
मेरे अल्फाज़. मेरी शायरी- मेरी एक माशूका. Ashok Kumar. 10 कविताएं. +. 79 Views. Like It. मेरी एक माशूका शायरी तो मेरी माशूका है, कभी-कभी हमें बहुत सताती है कभी वो मेरे पास आती है, कभी वो मुझसे दूर जाती है। वो ऐसी मेरी महबूबा है, कभी-कभी बहुत नख़रे दिखाती है कभी जब रूठ जाती है, तो महीनों पास नहीं आती है। पर आजकल वो हमसे, इस कदर मोहब्बत दिखाती है लिखने को मजबूर कर देती है, हमें सोते से जगाती है। न जाने कितने वो मुझे, इश्क के ऐसे आयने दिखाती है देखूँ किसी को भी, मगर सूरत उसी की नजर आती है। कभी गुदगुदाकर हंसाती है, कभी हमें बहुत रुलाती है कभी कानों में गुनगुनाती है, कभी मुझे लोरी सुनाती है। मेरी ज़िंदगी के तमाम राज, अपने सीने में दफ़नाती है कभी मुझको ...और अधिक »
अमर उजाला Wed, 22 Nov 2017 11:59:52 GMTView
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